चल उठ मुसाफ़िर
Indianbrighttabla
Erstellt von: TextSongAI
Erstellt am: 25.05.2026
Dauer: 1:45
[Verse] सूरज ने खिड़की खटखटाई किरणों ने चादर सरकाई कल जो रुका था डर के कारण आज वही मंज़िल बन आई [Pre-Chorus] पंछी बोले डाल-डाल पर उड़ना ही पहचान है चलते रहने वालों के ही हाथों में आसमान है [Chorus] चल उठ मुसाफ़िर भोर हुई सपनों की फिर डोर हुई राह नई है दिन नया है मेहनत से ही गौर हुई चल उठ मुसाफ़िर चल आसमान तेरा है चल
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