TextSongAI

चल उठ मुसाफ़िर

Indianbrighttabla

Created by: TextSongAI

Created: May 25, 2026

Duration: 1:46

[Verse]
सूरज ने खिड़की खटखटाई
किरणों ने चादर सरकाई
कल जो रुका था डर के कारण
आज वही मंज़िल बन आई

[Pre-Chorus]
पंछी बोले डाल-डाल पर
उड़ना ही पहचान है
चलते रहने वालों के ही
हाथों में आसमान है

[Chorus]
चल उठ मुसाफ़िर
भोर हुई
सपनों की फिर डोर हुई
राह नई है
दिन नया है
मेहनत से ही गौर हुई
चल उठ मुसाफ़िर
चल
आसमान तेरा है
चल

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